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Childhood Emotions- Bachpan ke Jazbaat

बचपन के जज़्बात

 

कोई मिला दे मुझे, मेरे बचपन से फिर,

जिंदगी कुछ बदली, बदली सी नजर आती है।

वो चंचल सी, अपनी सी जो थी जिंदगी,

अब बेगानी सी नजर आती है।

 

दोस्तों के साथ, बेबाक सी मैं,

डरी-डरी सी कब हो गई।

वो खुलकर हंसना, मुस्कुराना, लड़ना, बिगड़ना,

अब सोचने से भी घबराती हूँ मैं।

 

कुछ सकपकाई, कुछ धुंधलाई,

यादों में ख़ज़ाना संजोय इतराती हूँ मैं।

माँ-बाप छूटे, दोस्त छूटे,

अब ख़ुद को नहीं ढूंढ़ पाती हूँ मैं।

 

पुरानी चिठ्ठियों और तस्वीरों में भी ढूंढ़ा खुद को, 

दोस्त और रिश्तेदारों से भी पूछा।

पर वो खुद ही उलझनों में फंसे थे, 

मुझे मेरी छवि कहाँ से दिखाते?

 

यूँ तो सब है ज़िंदगी में,

पर वो ज़माने और थे।

हम तो ज़िंदा हैं,

पर हमारे दीवाने और भी थे।

 

आजकल यादों के झरोके ने फिर एक बार दस्तक दी है,

वो दिन भर का साथ, वो मस्ती, बेमिसाल थी मैं।

अब नए लोगों से कैसे मिलाऊँ मैं अपने आप को,

एक बार ख़ुद मिल लूं, फिर बताऊँ क्या थी मैं।

 

कोई मिला दे मुझे, मेरे बचपन से फिर,

जिंदगी कुछ बदली, बदली सी नजर आती है।

 

-वंदना जोशी भट्ट

 

Childhood Emotions

 

Someone bring my childhood back to sight,

Life has changed, in a different light.

 

That vibrant world, so uniquely spun,

Now distant, under a different sun.

 

With friends, I used to be carefree,

Now, fear has taken hold of me.

Laughing, smiling, with no restrain,

Now even thoughts stir an inner pain.

 

Some clear, some in a misty haze,

In the treasury of memories, my mind plays.

Parents gone, friends scattered afar,

Now even finding myself is bizarre.

 

Life holds it all within its grasp,

But those times had a special clasp.

We're alive, but back then, oh, how we thrived,

Passions ablaze, fully alive.

 

In letters old and pictures too, I sought myself anew, 

Asked friends and kin, in quandaries within.

They too were lost, it's true, 

Where does my image, clear and true, make its debut?

 

Lately, memories knock on my door,

Full-day camaraderie, laughter, and more.

Meeting new faces, where do I start?

Once I find myself, I'll share my heart.

 

Someone bring my childhood back to sight,

Life has changed, in a different light.

-Vandana Joshi Bhatt